प्रीमियर लीग में लिवरपूल की रचनात्मकता पर सवाल, लीड्स के खिलाफ दिखी कमजोरी; सुंदरलैंड में वापसी पर रोड्री ने छोड़ी छाप
प्रीमियर लीग के ताजा मुकाबलों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि शीर्ष टीमें भी दबाव के क्षणों में कमजोरियां उजागर कर देती हैं। लीड्स यूनाइटेड के खिलाफ लिवरपूल का मुकाबला इसका ताजा उदाहरण रहा, जहां रेड्स की टीम गेंद पर नियंत्रण रखने के बावजूद मौके बनाने में संघर्ष करती नजर आई। दूसरी ओर, सुंदरलैंड के खिलाफ मैनचेस्टर सिटी के मैच में रोड्री की वापसी ने टीम को संतुलन और आत्मविश्वास दोनों प्रदान किए।
लीड्स के खिलाफ लिवरपूल का प्रदर्शन कागजों पर भले ही मजबूत दिखे, लेकिन मैदान पर तस्वीर कुछ और ही थी। लिवरपूल ने अधिक पजेशन रखा, पासिंग में भी वह आगे रहा, लेकिन अंतिम थर्ड में उनकी रचनात्मकता पूरी तरह गायब दिखी। मोहम्मद सलाह और डार्विन नुनेज़ जैसे आक्रमणकारी खिलाड़ी लगातार डिफेंस के बीच फंसते रहे और साफ मौके नहीं बना सके।
मिडफील्ड से फॉरवर्ड लाइन तक गेंद को तेजी से पहुंचाने की जो पहचान लिवरपूल की रही है, वह इस मैच में कमजोर नजर आई। ट्रेंट अलेक्जेंडर-अर्नोल्ड की क्रॉसिंग भी प्रभावी नहीं रही, जबकि विपक्षी डिफेंस ने लिवरपूल के पैटर्न को अच्छी तरह पढ़ लिया था। यही कारण रहा कि मैच के अहम क्षणों में लिवरपूल को संघर्ष करना पड़ा।
लीड्स यूनाइटेड की बात करें तो उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद शानदार सामूहिक खेल दिखाया। उनका प्रेसिंग सिस्टम अनुशासित था और उन्होंने लिवरपूल के खिलाड़ियों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। यही रणनीति लिवरपूल के लिए सबसे बड़ी परेशानी साबित हुई।
अब नजर डालें मैनचेस्टर सिटी के प्रदर्शन पर, जहां सुंदरलैंड के खिलाफ मैच में रोड्री की वापसी टीम के लिए बड़ी राहत बनकर आई। चोट से उबरने के बाद रोड्री ने मिडफील्ड में अपनी मौजूदगी से ही खेल की दिशा बदल दी। उनका पोजिशनल सेंस, पासिंग की सटीकता और डिफेंस को कवर करने की क्षमता मैन सिटी को फिर से नियंत्रण में ले आई।
रोड्री की मौजूदगी का असर यह रहा कि केविन डी ब्रूयने और बर्नार्डो सिल्वा को आगे खेलने की ज्यादा आज़ादी मिली। इससे मैन सिटी का आक्रमण ज्यादा संतुलित और खतरनाक नजर आया। सुंदरलैंड ने शुरुआती मिनटों में दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन रोड्री ने मिडफील्ड में खेल को थाम लिया।
पेप गार्डियोला के लिए रोड्री की फिटनेस बेहद अहम मानी जाती है और इस मैच ने यह साफ कर दिया कि उनके बिना सिटी का मिडफील्ड कितना असंतुलित हो सकता है। सुंदरलैंड के खिलाफ रोड्री ने यह संदेश दे दिया कि वह अभी भी टीम की रीढ़ हैं।
प्रीमियर लीग के इन मुकाबलों से यह भी स्पष्ट होता है कि केवल स्टार खिलाड़ियों का होना ही काफी नहीं है, बल्कि सही सामूहिक तालमेल और रणनीतिक लचीलापन भी जरूरी है। लिवरपूल के लिए यह एक चेतावनी की तरह है कि उन्हें अपने आक्रमण में नए विकल्प और रचनात्मकता लाने की जरूरत है।
वहीं मैनचेस्टर सिटी के लिए रोड्री की वापसी सीजन के आगे के मुकाबलों के लिए सकारात्मक संकेत है। जैसे-जैसे लीग अपने निर्णायक दौर की ओर बढ़ेगी, ऐसे खिलाड़ी ही खिताबी दौड़ में अंतर पैदा करेंगे।
कुल मिलाकर, इस हफ्ते के प्रीमियर लीग मुकाबलों ने हिट्स और मिसेज़ दोनों को उजागर किया। जहां लिवरपूल की कमजोरी सामने आई, वहीं मैनचेस्टर सिटी को अपने भरोसेमंद मिडफील्ड जनरल की वापसी से मजबूती मिली। आने वाले मैचों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या लिवरपूल अपनी रचनात्मक समस्या का समाधान ढूंढ पाता है या नहीं, और क्या रोड्री की फिटनेस सिटी को एक बार फिर खिताब की ओर ले जा सकती है।