नए साल से पहले सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी टूटी मुनाफा बुक करें या होल्ड करें?
नए साल से ठीक पहले भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज़ गिरावट देखने को मिली है। 30 दिसंबर को सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव भी कमजोर पड़े। इस अचानक आई गिरावट ने निवेशकों और आम खरीदारों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस समय मुनाफा बुक करना सही रहेगा या फिर कीमतों में आगे और तेजी की उम्मीद में निवेश को होल्ड करना बेहतर विकल्प है।
सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण माने जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने सोने पर दबाव बनाया है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की मांग में कमी देखने को मिलती है, क्योंकि सोना डॉलर में महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ता है।
इसके अलावा, हाल के दिनों में सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। ऐसे में कई निवेशकों ने साल के अंत में मुनाफा बुक करना बेहतर समझा। वर्ष समाप्ति से पहले पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए की गई यह मुनाफावसूली भी सोने की कीमतों में गिरावट का एक बड़ा कारण मानी जा रही है।
चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली है। चांदी न केवल एक कीमती धातु है, बल्कि इसका औद्योगिक उपयोग भी बड़े पैमाने पर होता है। वैश्विक आर्थिक संकेतों में नरमी और कुछ उद्योगों में मांग को लेकर अनिश्चितता ने चांदी की कीमतों पर दबाव डाला है। हालांकि, दीर्घकालिक दृष्टिकोण से चांदी की मांग ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों के चलते मजबूत बनी रह सकती है।
घरेलू बाजार की बात करें तो रुपये की चाल ने भी सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित किया है। हाल के सत्रों में रुपये में सीमित मजबूती देखने को मिली, जिससे आयातित कीमती धातुओं की कीमतों में कुछ नरमी आई। इसके अलावा, शादी-विवाह के सीजन के बावजूद ऊंचे दामों के कारण मांग पहले से ही थोड़ी कमजोर चल रही थी।
अब सवाल यह उठता है कि निवेशकों को इस स्थिति में क्या रणनीति अपनानी चाहिए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक निवेशकों के लिए यह मुनाफा बुक करने का सही मौका हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने निचले स्तर पर खरीदारी की थी। साल के अंत में मुनाफा सुरक्षित करना एक समझदारी भरा कदम माना जा सकता है।
वहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए तस्वीर थोड़ी अलग है। विशेषज्ञों के अनुसार, सोना अभी भी एक सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीदें लंबे समय में सोने को समर्थन दे सकती हैं। ऐसे निवेशकों के लिए गिरावट को चरणबद्ध तरीके से खरीदारी के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है।
चांदी के मामले में भी यही रणनीति अपनाई जा सकती है। हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है, लेकिन दीर्घकाल में औद्योगिक मांग इसके पक्ष में जा सकती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे जल्दबाज़ी में कोई फैसला न लें और अपने निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर कदम उठाएं।
ज्वैलरी खरीदने वालों के लिए यह गिरावट राहत लेकर आई है। नए साल और आने वाले त्योहारों को देखते हुए सोने और चांदी की कीमतों में आई नरमी खरीदारी का मौका दे सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कीमतों पर नजर बनाए रखें, क्योंकि बाजार में अभी भी अस्थिरता बनी हुई है।
कुल मिलाकर, नए साल से पहले सोने और चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट कई कारकों का नतीजा है। मुनाफा बुक करना या होल्ड करना पूरी तरह निवेशक की रणनीति और समय सीमा पर निर्भर करता है। अल्पकालिक निवेशक जहां सतर्कता बरत सकते हैं, वहीं दीर्घकालिक निवेशकों के लिए कीमती धातुओं की चमक अभी फीकी नहीं पड़ी है। आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत और आर्थिक आंकड़े तय करेंगे कि सोना-चांदी की कीमतें किस दिशा में आगे बढ़ती हैं।