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किया भारत में हाइब्रिड कारें पेश करने को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध, सीनियर VP अतुल सूद का बयान

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में हाइब्रिड कारों को लेकर काफी उत्साह और अपेक्षाएँ हैं, और इसी बीच किआ मोटर्स ने स्पष्ट कर

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किया भारत में हाइब्रिड कारें पेश करने को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध, सीनियर VP अतुल सूद का बयान
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में हाइब्रिड कारों को लेकर काफी उत्साह और अपेक्षाएँ हैं, और इसी बीच किआ मोटर्स ने स्पष्ट कर दिया है कि वह भारत में हाइब्रिड तकनीक को शुरू करने को लेकर पूरी तरह दृढ़ है। किआ इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (सेल्स एंड मार्केटिंग) अतुल सूद ने हाल ही में कहा कि कंपनी इस दिशा में काम कर रही है और भविष्य में हाइब्रिड कारों को भारतीय सड़कों पर जारी करने की योजना पक्का कर रही है।

भारत में हाइब्रिड कारें अभी भी अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है, खासकर ऊँचे किफायती और ईंधन दक्षता में रुचि रखने वाले ग्राहकों के बीच। इस पर बात करते हुए अतुल सूद ने बताया कि किआ ने भारत में हाइब्रिड पावरट्रेन लाने की रणनीति को प्राथमिकता दी है, लेकिन इसकी कीमत को ग्राहकों के लिए सस्ता और प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। इसीलिए कंपनी हाइब्रिड तकनीक के मुख्य घटकों  जैसे मोटर्स, बैटरी पैक और कंट्रोल यूनिट  को भारत में स्थानीय स्तर पर तैयार करने की योजना पर काम कर रही है, ताकि कीमत नियंत्रण में रहे।

सूद के अनुसार, हाइब्रिड कार लॉन्च करना केवल तकनीक लाना नहीं है, बल्कि उस तकनीक को उस मूल्य पर उपलब्ध कराना है जिससे भारतीय ग्राहक उसे खरीदना चाहें। उन्होंने कहा कि भारत में हाइब्रिड तकनीक की स्थानीयकरण (localisation) आवश्यक है ताकि उत्पादन लागत कम हो सके और वाहन की कीमत ग्राहकों के बजट में आ सके। यदि घटकों का स्थानीय उत्पादन समय रहते संभव हो जाता है, तो हाइब्रिड मॉडल अगले 12–18 महीनों के भीतर बाजार में दिखाई दे सकते हैं।

किआ इंडिया ने विशेष रूप से संकेत दिया है कि नई Seltos SUV का हाइब्रिड वर्ज़न विकसित किया जा रहा है, लेकिन वह तब तक लॉन्च नहीं होगा जब तक कंपनी को यह सुनिश्चित न हो कि संबंधित घटकों की स्थानीय आपूर्ति सुलभ है और कीमत ग्राहकों के लिए उपयुक्त बनी रह सकती है। अतुल सूद ने कहा कि यह हाइब्रिड मॉडल आने वाला है  ‘यह केवल समय की बात है, नहीं तो नहीं’  लेकिन यह निर्भर करेगा कि स्थानीयकरण कितनी जल्दी पूरा हो पाता है।

यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय बाजार में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक दोनों प्रकार के वाहन धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। हालांकि पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन (EV) की मांग बढ़ रही है, बहुत से ग्राहक अभी भी एक ऐसा विकल्प चाहते हैं जो ईंधन दक्षता और लंबी दूरी की ड्राइविंग के बीच संतुलन प्रदान करे  और वही हाइब्रिड तकनीक कर सकती है। किआ के प्रबंधन का मानना है कि हाइब्रिड तकनीक भारतीय बाजार के संदर्भ में एक व्यावहारिक ट्रांज़िशनल टेक्नोलॉजी के रूप में काम करेगी।

गौरतलब है कि टाटा, मारुति सुजुकी और टोयोटा जैसी कंपनियाँ भी भारत में हाइब्रिड तकनीक को विकसित करने और पेश करने के लिए काम कर रही हैं। इस प्रतिस्पर्धी परिदृश्य में, किआ की प्रतिबद्धता यह स्पष्ट करती है कि वह न सिर्फ तकनीकी रूप से सक्षम उत्पाद लाना चाहती है, बल्कि एक ऐसा उत्पाद देना चाहती है जो भारतीय ग्राहकों के चयन और खरीद निर्णयों में आसानी से फिट हो सके।

इसके अलावा अतुल सूद ने यह भी कहा कि कंपनी हाइब्रिड की टाइमलाइन को अंतिम रूप देने के करीब है और आने वाले कुछ महीनों में एक स्पष्ट रोडमैप घोषित किया जा सकता है। किआ का उद्देश्य है कि हाइब्रिड कारें भारत में पर्यावरण के अनुकूल, किफायती और तकनीकी रूप से उन्नत विकल्प के रूप में उभरें  जिससे ग्राहकों को बेहतर ईंधन दक्षता और ड्राइविंग अनुभव मिले।


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