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डोनाल्ड ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' अभियान के बावजूद फोर्ड का भारत में निवेश: वैश्विक विनिर्माण नीति और व्यापारिक समीकरणों का आकलन

अमेरिकन कार निर्माता कंपनी फोर्ड मोटर कंपनी ने भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग इकाई को पुनर्जीवित करने के लिए एक म

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₹3,250 करोड़ के निवेश से चेन्नई में उत्पन्न होने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर और उनका स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

अमेरिकन कार निर्माता कंपनी फोर्ड मोटर कंपनी ने भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग इकाई को पुनर्जीवित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। फोर्ड ने घोषणा की है कि वह २०२९ से निर्यात के लिए नेक्स्ट जनरेशन इंजन बनाने के लिए चेन्नई के पास स्थित अपने मराईमलाई नगर प्लांट में ₹3,250 करोड़ (लगभग ३७० मिलियन डॉलर) का नया निवेश करेगी। कंपनी ने इस संबंध में तमिलनाडु सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम फोर्ड की भारत में पूर्ण वापसी नहीं है, बल्कि यह देश को अपने वैश्विक विनिर्माण नेटवर्क में एक इंजन निर्यात हब के रूप में मजबूत करने का संकेत देता है।


फोर्ड ने २०२१ में भारत में वाहन उत्पादन बंद कर दिया था, लेकिन अब इस नए निवेश से एक बार फिर विनिर्माण परिचालन शुरू होगा। इस परियोजना से २०२९ में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है और संयंत्र की वार्षिक क्षमता २,३५,००० इंजन होगी। इस निवेश से ६०० से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियों और आपूर्तिकर्ता नेटवर्क में सैकड़ों अप्रत्यक्ष नौकरियों के सृजित होने की उम्मीद है। फोर्ड के अधिकारियों ने कहा है कि यह निर्णय 'फोर्ड+' योजना के हिस्से के रूप में भारत की विनिर्माण विशेषज्ञता का लाभ उठाने की उनकी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


डोनाल्ड ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' अभियान के विपरीत निर्णय


फोर्ड का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी और विदेशी कंपनियों से विनिर्माण और नौकरियों को वापस अमेरिका लाने का लगातार आग्रह कर रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में इस कदम को ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' और 'बिल्ड इन अमेरिका' अभियान के विपरीत एक 'रणनीतिक निर्णय' के रूप में देखा जा रहा है। फोर्ड ने पहले अमेरिका में बड़े निवेश की घोषणा करके ट्रंप की प्रशंसा हासिल की थी, लेकिन भारत में यह नया निवेश कंपनी की वैश्विक रणनीति के लचीलेपन और भारत की मजबूत विनिर्माण क्षमता में उसके नए विश्वास को दर्शाता है।


हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि चेन्नई में बनाए जाने वाले ये नेक्स्ट जनरेशन इंजन केवल वैश्विक बाजारों में निर्यात किए जाएंगे। फोर्ड ने फिलहाल भारतीय घरेलू यात्री वाहन बाजार में अपनी कारों को फिर से लॉन्च करने की कोई तत्काल घोषणा नहीं की है। फोर्ड ने गुजरात के सानंद में स्थित अपना कार निर्माण संयंत्र टाटा मोटर्स को बेच दिया था, लेकिन उसने चेन्नई और सानंद दोनों जगहों पर इंजन निर्माण सुविधाओं को बनाए रखा था। नया निवेश चेन्नई प्लांट को फोर्ड के मौजूदा भारतीय इंजन प्लांट का पूरक बनाएगा।


फोर्ड के इस कदम का तमिलनाडु के उद्योग जगत ने स्वागत किया है, जहां पहले से ही हुंडई, रेनॉल्ट और बीएमडब्ल्यू जैसे बड़े ऑटोमेकर मौजूद हैं। इस निवेश से तमिलनाडु के ऑटोमोटिव सेक्टर को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल और एक आकर्षक निर्यात आधार के रूप में इसकी बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।


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