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आर्यन खान केस से जुड़ा मामला समीर वानखेड़े की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख तय

बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को दिल्ली हाईकोर्ट ने समन ज

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मानहानि का कानूनी दांवपेच शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस और नेटफ्लिक्स को ७ दिनों में देना होगा जवाब

बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को दिल्ली हाईकोर्ट ने समन जारी किया है। यह कार्रवाई पूर्व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) अधिकारी समीर वानखेड़े द्वारा दायर मानहानि याचिका के संबंध में की गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों संस्थाओं को निर्देश दिया है कि वे ७ दिनों के भीतर इस मामले पर अपना जवाब दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई की तारीख ३० अक्टूबर तय की गई है।


समीर वानखेड़े ने यह याचिका आर्यन खान क्रूज ड्रग्स मामले से जुड़ी घटनाओं और उसके बाद हुए घटनाक्रमों पर आधारित किसी भी प्रकार की फिल्म, वेब सीरीज़ या डॉक्यूमेंट्री के प्रकाशन या प्रसारण को रोकने के लिए दायर की है। वानखेड़े का आरोप है कि शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस द्वारा बनाई जा रही और नेटफ्लिक्स पर प्रसारित होने वाली कोई भी सामग्री, जिसमें इस केस का उल्लेख होगा, उनकी छवि खराब कर सकती है और व्यक्तिगत मानहानि कर सकती है। उनका मानना है कि इस तरह की सामग्री उनके चरित्र को गलत तरीके से पेश कर सकती है और उन्हें दुर्भावनापूर्ण रूप से चित्रित कर सकती है।


वानखेड़े ने कोर्ट में अपनी याचिका में तर्क दिया है कि उन्हें और उनके परिवार को आर्यन खान केस के बाद से लगातार परेशानी और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में, यदि इस संवेदनशील मामले पर आधारित कोई भी सामग्री सार्वजनिक होती है, तो यह उनकी प्रतिष्ठा को और नुकसान पहुंचाएगी। उन्होंने मांग की है कि किसी भी कंटेंट को सार्वजनिक करने से पहले उन्हें देखने का मौका दिया जाए, ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि उसमें उनके बारे में कोई मानहानिकारक या गलत तथ्य न हों।


दिल्ली हाईकोर्ट ने वानखेड़े की दलीलों को सुनने के बाद, मामले की गंभीरता को देखते हुए शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस और नेटफ्लिक्स इंडिया को समन भेजा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वे जल्द से जल्द अपना पक्ष रखें ताकि इस कानूनी विवाद पर आगे बढ़ा जा सके। ३० अक्टूबर को होने वाली सुनवाई इस मामले में निर्णायक हो सकती है, जिसमें कोर्ट यह तय करेगा कि क्या इस तरह की कंटेंट पर रोक लगाई जाए या नहीं। यह पूरा मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच कानूनी संघर्ष को दर्शाता है। इस कानूनी लड़ाई ने एक बार फिर आर्यन खान केस से जुड़े विवादों को सुर्खियों में ला दिया है।



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