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NEP 2020 के तहत बड़ी पहल आयुर्वेद होगा पाठ्यक्रम का हिस्सा अगले शैक्षणिक सत्र से बदलेगा सिलेबस

भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को अब देश के स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है। र

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UGC और NCERT का आयुर्वेद पर फोकस स्कूलों और कॉलेजों में पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा

भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को अब देश के स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं और जल्द ही आयुर्वेद से संबंधित कोर्स मॉड्यूल तैयार करेंगे। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।


अगले शैक्षणिक सत्र से बदल सकता है सिलेबस

अधिकारियों के अनुसार, NCERT स्कूलों के लिए और UGC कॉलेजों और उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए आयुर्वेद पर केंद्रित मॉड्यूल विकसित करने की प्रक्रिया में हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों और कॉलेजों के सिलेबस में आयुर्वेद का समावेश हो जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को न केवल आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों से परिचित कराना है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करना भी है।


UGC NET में 'आयुर्वेद बायोलॉजी' का समावेश

आयुर्वेद के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए, UGC ने पहले ही राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) में 'आयुर्वेद बायोलॉजी' को एक नए विषय के रूप में शामिल करने की घोषणा की है। यह निर्णय दिसंबर 2024 चक्र से प्रभावी होगा। NCERT भी स्कूल स्तर पर आयुष के ज्ञान, जिसमें योग और आयुर्वेद शामिल हैं, को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।


पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने पर ज़ोर

इस पहल के तहत, स्कूलों में छात्रों को आयुर्वेद के बुनियादी सिद्धांतों जैसे दिनचर्या (दैनिक दिनचर्या), ऋतुचर्या (मौसमी दिनचर्या), और प्राकृतिक उपचारों के महत्व के बारे में सिखाया जाएगा। वहीं, कॉलेजों में छात्रों के लिए यह विषय इंटरडिसिप्लिनरी ज्ञान प्राप्त करने का एक माध्यम बनेगा, जो उन्हें आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने में मदद करेगा। NCERT और UGC की यह संयुक्त पहल आयुर्वेद को केवल एक चिकित्सा पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवन शैली के दर्शन के रूप में स्थापित करने का प्रयास है। यह छात्रों को न केवल स्वास्थ्य के बारे में शिक्षित करेगा, बल्कि उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ेगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि NCERT और UGC का यह कदम आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देगा, जिससे आयुर्वेद स्नातकों के लिए अकादमिक और अनुसंधान के अवसरों का विस्तार होगा।


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