माइक्रोसॉफ्ट ने पाकिस्तान में प्रत्यक्ष संचालन बंद किया: अब क्षेत्रीय कार्यालय और लोकल पार्टनर्स से मिलेगी सेवा
दुनिया की अग्रणी टेक्नोलॉजी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने पाकिस्तान में अपना प्रत्यक्ष संचालन (Direct Operations) बंद करने का फ
दुनिया की अग्रणी टेक्नोलॉजी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने पाकिस्तान में अपना प्रत्यक्ष संचालन (Direct Operations) बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय पाकिस्तान में लगातार बिगड़ते राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक हालातों के चलते लिया गया है।
अब माइक्रोसॉफ्ट की सेवाएं पाकिस्तान में सीधे तौर पर नहीं बल्कि रीजनल ऑफिस और लोकल बिज़नेस पार्टनर्स के माध्यम से दी जाएंगी। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि कंपनी अब वहां का संचालन स्थानीय सहयोगियों के सहयोग से जारी रखेगी, जिससे ग्राहकों को तकनीकी समाधान और समर्थन मिलना जारी रहेगा।
बदलती रणनीति का कारण
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान में चल रही मुद्रा अस्थिरता, विदेशी निवेश में गिरावट, और कठिन टैक्स नीतियों के कारण कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वहां से अपने ऑपरेशन्स सीमित या बंद कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम भी इन्हीं जमीनी वास्तविकताओं का प्रतिबिंब है।
ग्राहकों को सेवा जारी रहेगी
हालांकि कंपनी का प्रत्यक्ष कार्यालय अब बंद हो चुका है, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट यह सुनिश्चित कर रही है कि वहां के उपयोगकर्ताओं, कॉर्पोरेट ग्राहकों और संस्थानों को सेवा में कोई बाधा न हो। इसके लिए कंपनी अब अपने दक्षिण एशिया रीजनल ऑफिस के ज़रिए काम करेगी और लोकल सॉल्यूशन प्रोवाइडर्स और आईटी पार्टनर्स के साथ मिलकर सेवाएं प्रदान करेगी।
टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री पर प्रभाव
पाकिस्तान में माइक्रोसॉफ्ट जैसे दिग्गज का प्रत्यक्ष संचालन बंद करना आईटी सेक्टर के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यह कदम स्थानीय स्टार्टअप्स, छात्रों, डेवलपर्स और कॉर्पोरेट संस्थानों को प्रभावित कर सकता है जो माइक्रोसॉफ्ट की डायरेक्ट एंगेजमेंट से लाभ उठाते थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर देश में स्थायित्व नहीं आया, तो भविष्य में और भी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ निवेश और संचालन से पीछे हट सकती हैं।
माइक्रोसॉफ्ट का पाकिस्तान से प्रत्यक्ष संचालन हटाना महज एक कॉर्पोरेट निर्णय नहीं, बल्कि उस देश में उत्पन्न वास्तविक व्यावसायिक चुनौतियों और जोखिमों को उजागर करता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकल पार्टनर्स इस चुनौती को कैसे संभालते हैं और क्या सरकार टेक्नोलॉजी सेक्टर में भरोसा बहाल करने के लिए कदम उठाती है या नहीं।
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