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दिल्ली दंगे मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का BJP ने किया स्वागत, कांग्रेस से टुकड़े टुकड़े गैंग के समर्थन पर माफी की मांग

दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद देश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने सर्वोच्च अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे कानून और न्याय की जीत बताया है। साथ ही बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी ने कथित रूप से ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का समर्थन किया, जिसके लिए उसे देश से माफी मांगनी चाहिए।

बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह साबित करता है कि देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था तथ्यों और कानून के आधार पर निर्णय लेती है, न कि किसी राजनीतिक दबाव में। पार्टी का दावा है कि दिल्ली दंगों को लेकर लंबे समय से जो भ्रम फैलाया जा रहा था, उस पर अब विराम लगना चाहिए।

बीजेपी नेताओं ने कहा कि दंगों के दौरान हिंसा फैलाने वालों और साजिश रचने वालों के खिलाफ कार्रवाई होना जरूरी है। उनके मुताबिक, कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों ने उस समय हिंसा को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की, जिससे माहौल और बिगड़ा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐसे प्रयासों पर करारा जवाब है।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बीजेपी ने कहा कि विपक्ष ने बिना सबूत के आरोप लगाए और देश की संस्थाओं पर सवाल खड़े किए। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बयान दिया कि कांग्रेस ने उन लोगों का बचाव किया, जिन्हें देश विरोधी गतिविधियों से जोड़ा जाता रहा है। बीजेपी का कहना है कि अब कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए और अपने रुख के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। उनका आरोप है कि सत्ताधारी पार्टी हर संवेदनशील मुद्दे को विपक्ष पर हमला करने के अवसर के रूप में देखती है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि वह न्यायपालिका का सम्मान करती है, लेकिन किसी भी तरह के राजनीतिक लेबल को खारिज करती है।

दिल्ली दंगों का मामला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र रहा है। वर्ष 2020 में हुई हिंसा में कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में संपत्तियों को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद से ही विभिन्न मामलों की जांच और सुनवाई अलग-अलग अदालतों में चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को उसी कड़ी का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह संकेत देता है कि जांच एजेंसियों और निचली अदालतों को कानून के दायरे में रहकर अपना काम करना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय सबूतों और तथ्यों के आधार पर ही लिया जाएगा।

बीजेपी का कहना है कि दिल्ली दंगों के पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को सजा। पार्टी ने दोहराया कि राजनीति से ऊपर उठकर देश की शांति और एकता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि न्याय की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष को सजा न मिले।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले को न्याय की जीत बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक बयानबाजी से जोड़कर देख रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर और तेज हो सकता है। दिल्ली दंगों का मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह साफ है कि इस पर सियासी बयानबाजी फिलहाल थमने वाली नहीं है।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने एक बार फिर दिल्ली दंगों के मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। बीजेपी इसे अपनी राजनीति के समर्थन में देख रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बता रही है। आगे यह देखना अहम होगा कि कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और राजनीतिक दल इस मुद्दे को किस तरह से आगे ले जाते हैं।