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"2025 में कौन सा कार्ड है आपके लिए बेस्ट? क्रेडिट बनाम डेबिट कार्ड की तुलना"

क्रेडिट कार्ड से जुड़े नए नियम: चार्ज, लिमिट और सिक्योरिटी में बड़ा बदलाव

2025 की शुरुआत के साथ ही बैंकिंग सेक्टर में कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जिनमें सबसे अहम बदलाव क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में हुआ है। अब कार्डधारकों को चार्जेस, क्रेडिट लिमिट और सिक्योरिटी से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता और सुरक्षा मिलने जा रही है।


1. चार्ज में पारदर्शिता

पहले ग्राहकों को कार्ड से लेन-देन करने पर छिपे हुए चार्जेस की जानकारी नहीं होती थी, जिससे बाद में परेशानी होती थी। लेकिन नए नियमों के तहत बैंकों को अब सभी चार्जेस को स्पष्ट रूप से बताना होगा। चाहे वो एनुअल फीस हो, लेट पेमेंट चार्ज या इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन फीस – सबकुछ पहले से ग्राहकों को बताना अनिवार्य होगा।


2. क्रेडिट लिमिट में लचीलापन

अब कार्डधारकों को अपनी क्रेडिट लिमिट पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा। ग्राहक अब अपनी आवश्यकता अनुसार लिमिट घटा-बढ़ा सकते हैं, और यह प्रक्रिया ऑनलाइन भी की जा सकती है। बैंकों को भी लिमिट बढ़ाने से पहले ग्राहक की अनुमति लेना जरूरी होगा।


3. सिक्योरिटी में बड़ा अपडेट

ऑनलाइन फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए नए नियमों में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। अब हर ट्रांजैक्शन पर OTP अनिवार्य होगा, साथ ही ग्राहकों को ट्रांजैक्शन अलर्ट तुरंत मिलेगा। इसके अलावा, ‘वीजा’ और ‘मास्टरकार्ड’ जैसी कंपनियों ने भी नए AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लागू किए हैं।


4. ग्राहक अधिकारों में विस्तार

अब ग्राहक यदि किसी चार्ज या ट्रांजैक्शन से असहमत हैं तो 7 दिनों के भीतर शिकायत कर सकते हैं, और बैंक को 15 दिनों में समाधान देना अनिवार्य होगा। इससे ग्राहक अनुभव और भी बेहतर होने की उम्मीद है।


निष्कर्ष:
क्रेडिट कार्ड अब सिर्फ खर्च करने का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि स्मार्ट फाइनेंशियल टूल बन चुका है। नए नियमों से पारदर्शिता, सुरक्षा और ग्राहक अधिकारों को मजबूती मिली है, जिससे कार्ड यूजर्स को अधिक सुविधा और आत्मविश्वास मिलेगा