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गंगा एक्सप्रेसवे शुरू: PM मोदी ने दी 594 किमी हाईवे की सौगात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात देते हुए 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। यह महत्वाकांक्षी परियोजना मेरठ से प्रयागराज तक 12 जिलों को जोड़ने का काम करेगी। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से राज्य में कनेक्टिविटी, व्यापार, उद्योग और पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी सड़क परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी उत्तर प्रदेश से तेज और आधुनिक सड़क मार्ग के जरिए जोड़ने का काम करेगी। इससे लाखों लोगों को यात्रा में सुविधा मिलेगी और समय की बचत भी होगी।किन जिलों को जोड़ेगा गंगा एक्सप्रेसवे?यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाएगा और रास्ते में कुल 12 जिलों को जोड़ेगा। इससे राज्य के कई प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को सीधा फायदा मिलेगा।एक्सप्रेसवे जिन क्षेत्रों को जोड़ने में मदद करेगा, वहां निवेश बढ़ने की संभावना है। बेहतर सड़क नेटवर्क होने से कंपनियों और उद्योगों को माल ढुलाई में आसानी होगी।यात्रा होगी आ -
ममता बनर्जी के गढ़ में BJP का असली इम्तिहान: संदेशखाली से सीमा तक चुनावी जंग पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। राज्य के कई संवेदनशील क्षेत्रों में चुनावी माहौल गर्म हो चुका है, खासकर संदेशखाली से लेकर बांग्लादेश बॉर्डर तक। यह इलाका लंबे समय से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।अब इस क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।संदेशखाली क्यों बना चुनावी केंद्र?संदेशखाली हाल के समय में राजनीतिक और सामाजिक कारणों से चर्चा में रहा है। यहां की घटनाओं ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। इसी वजह से यह इलाका अब चुनावी रणनीति का अहम केंद्र बन गया है।राजनीतिक दलों के लिए यह सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि एक प्रतीक बन चुका है जहां से वे अपनी ताकत और जनसमर्थन का संदेश पूरे राज्य में देना चाहते हैं।ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ममता बनर्जी का राजनीतिक प्रभाव पश्चिम बंगाल के ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में काफी मजबूत रहा है। उनकी सरकार की योजनाएं, स्थानीय नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचा उन्हें लगातार -
मोहन भागवत की सुरक्षा पर खर्च वसूली याचिका पर कोर्ट सख्त, उठाए कई सवाल बॉम्बे हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े खर्च की वसूली को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इस मामले में अदालत ने न केवल याचिका को अस्वीकार किया, बल्कि याचिकाकर्ता के तर्कों और मंशा पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर वीआईपी सुरक्षा और उससे जुड़े खर्चों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।क्या था पूरा मामला?यह याचिका इस मांग के साथ दायर की गई थी कि मोहन भागवत को प्रदान की जा रही सुरक्षा पर होने वाले खर्च की भरपाई उनसे की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता का तर्क था कि सरकारी संसाधनों का उपयोग किसी निजी व्यक्ति की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है, इसलिए इसका खर्च सार्वजनिक धन पर नहीं पड़ना चाहिए।हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि सुरक्षा प्रदान करना राज्य की जिम्मेदारी है, खासकर उन व्यक्तियों के लिए जिन्हें खतरे का आकलन किया गया हो। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सुरक्षा का निर्णय संबंधित एजेंसियों द्वारा खतरे के स्तर के आधार पर लिया जाता है, न कि व्यक्तिगत -
DU से पढ़ीं जस्टिस स्वर्णकांता का बड़ा बयान, केजरीवाल को कोर्ट में दिया सख्त जवाब दिल्ली हाईकोर्ट की जज स्वर्णकांता इन दिनों सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक अहम सुनवाई के दौरान उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़ी टिप्पणी की, जिसके बाद उनका नाम चर्चा का विषय बन गया। अदालत में दिया गया उनका जवाब न केवल कानूनी गलियारों में बल्कि सोशल मीडिया और आम जनता के बीच भी तेजी से वायरल हो गया।जस्टिस स्वर्णकांता की पहचान एक सख्त और स्पष्ट विचारों वाली न्यायाधीश के रूप में की जाती है। उनके फैसले और टिप्पणियां अक्सर कानून के दायरे में रहते हुए स्पष्ट संदेश देने वाली होती हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब उन्होंने अदालत में सुनवाई के दौरान तीखी प्रतिक्रिया दी।क्या है पूरा मामला?मामला उस समय चर्चा में आया जब दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी, जिसमें अरविंद केजरीवाल से संबंधित मुद्दे उठाए गए थे। सुनवाई के दौरान जब पक्षों के बीच बहस चल रही थी, तभी जस्टिस स्वर्णकांता ने एक टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कर दिया कि अदालत तथ्यों और कानून के आधार पर ही निर्णय लेगी, न कि किसी राजनीतिक बयानबाजी या बाहरी दबाव के आध -
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्तूबर को मुजफ्फरपुर और छपरा में करेंगे चुनावी रैली बिहार भाजपा अध्यक्ष ने दी जानकारी बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनावी अभियान छठ महापर्व के तुरंत बाद एक बार फिर जोर पकड़ेगा। बिहार भाजपा अध्यक्ष ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री मोदी 30 अक्तूबर को राज्य के दो महत्वपूर्ण जिलों मुजफ्फरपुर और छपरा का दौरा करेंगे और विशाल चुनावी जनसभाओं को संबोधित करेंगे। मुजफ्फरपुर में उनकी रैली का आयोजन मोतीपुर चीनी मिल के विशाल मैदान में किया जाएगा, जबकि छपरा में भी एक बड़ी सभा आयोजित करने की योजना है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य में चुनावी माहौल पूरे चरम पर है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है।मुजफ्फरपुर की मोतीपुर चीनी मिल का मैदान ऐतिहासिक रूप से बड़ी राजनीतिक सभाओं का केंद्र रहा है। इस विशाल मैदान में प्रधानमंत्री की रैली को सफल बनाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि इस रैली में मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों जैसे पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और सीतामढ़ी के लाखों स - View all